Monday, June 21, 2010

थम सा गया है ज़िन्दगी में

थम सा गया है ज़िन्दगी में, सिलसिला कशमकश का टूटता नही है....

कभी वोह पराया सा महसूस होता है,
और कभी ग़ैर लगता नही है...

मैं ख़ुशी पाने कि चाह में तनहा हु
या तनहाई में ही खुश हूँ
उलझ गया है यह सवाल सुलझता नही है.....

इस क़दर खो गयी हु मैं दुनिया कि भीड़ में,
अब ढूंढे से भी मंजिल का पता मिलता नही है......

बातें करके रुला ना दीजिएगा...

बातें करके रुला ना दीजिएगा...
यू चुप रहके सज़ा ना दीजिएगा...

ना दे सके ख़ुशी, तो ग़म ही सही...
पर दोस्त बना के यूही भुला ना दीजिएगा...

खुदा ने दोस्त को दोस्त से मिलाया...
दोस्तो के लिए दोस्ती का रिस्ता बनाया...

पर कहते है दोस्ती रहेगी उसकी क़ायम...
जिसने दोस्ती को दिल से निभाया...

अब और मंज़िल पाने की हसरत नही...
किसी की याद मे मर जाने की फ़ितरत नही...

आप जैसे दोस्त जबसे मिले...
किसी और को दोस्त बनाने की ज़रूरत नही

Saturday, June 19, 2010

याद आता है

जब कभी गुजरा जमाना याद आता है, बना मिटटी

का अपना घर पुराना याद आता है। वो पापा से

चवन्नी रोज मिलती जेब खरचे को, वो अम्मा

से मिला एक आध-आना याद आता है। वो छोटे भाई

का लडना, शाम को फिर

भूल जाना याद आता है। वो घर के सामने की

अधखुली खिङकी अभी भी है, वहाँ पर छिप कर

किसी का मुस्कुराना याद आता है |

Saturday, June 5, 2010

विश्व पर्यावरण दिवस

आज विश्व पर्यावरण दिवस है.

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जब हम होली,दिवाली,ईद और कई दूसरे उत्सव में तो बढ़ चढ़ के उत्साह दिखाते हैं पर जब बात पर्यावरण की करते हैं चाहे वो ग्लोबल वार्मिंग,हो या एड्स,जहाँ मानवता पहले आनी चाहिए वहां हम कभी भाग नहीं लेते.

आइये हम सब मिलके एक छोटी सी कोशिश करते हैं इस धरा को बचाने की.क्योकि कोशिशें कामयाब हो जाती हैं.

आप और हम जो भी कर सकते है वो भी किसी न किसी रूप में एक बहुत बड़ा योगदान होगा.