जब कभी गुजरा जमाना याद आता है, बना मिटटी
का अपना घर पुराना याद आता है। वो पापा से
चवन्नी रोज मिलती जेब खरचे को, वो अम्मा
से मिला एक आध-आना याद आता है। वो छोटे भाई
का लडना, शाम को फिर
भूल जाना याद आता है। वो घर के सामने की
अधखुली खिङकी अभी भी है, वहाँ पर छिप कर
किसी का मुस्कुराना याद आता है |
का अपना घर पुराना याद आता है। वो पापा से
चवन्नी रोज मिलती जेब खरचे को, वो अम्मा
से मिला एक आध-आना याद आता है। वो छोटे भाई
का लडना, शाम को फिर
भूल जाना याद आता है। वो घर के सामने की
अधखुली खिङकी अभी भी है, वहाँ पर छिप कर
किसी का मुस्कुराना याद आता है |
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