दूरदर्शन 50 साल का हो चुका है। जब कोई चैनल नहीं था, तो बस दूरदर्शन था। कई पीढ़ियां इसके सीरियल्स के किरदारों को देखते-सुनते बड़ी हुईं। आज भी वे बेमिसाल सीरियल्स बरबस याद आ जाते हैं। आइए एक बार फिर याद करें उन्हें...
रजनीः रजनी...कॉटन की साड़ी और एक बड़ी सी बिंदी वाली रजनी के चरित्र को प्रिया तेंडुलकर ने अमर बना दिया था।
हमलोगः भला हमलोग को कौन भूल सकता है। भागवंती, बसेसर राम, लल्लू, बड़की, मझली, नन्हे और छुटकी और हमेशा रूठी-रूठी सी रहने वाली दादी (सुषमा सेठ)। और हां हर ऐपिसोड के आखिर में दादा मुनि यानी अशोक कुमार की ऐंट्री... याद है ना।
भारत एक खोजः जवाहरलाल नेहरू की किताब 'भारत एक खोज' पर बने इस सीरियल ने भारत की 5000 हजार सालों की संस्कृति की यात्रा घर बैठे करवा दी।
यह जो है जिंदगीः आज के हंसोड़ सीरियल्स की भीड़ में रेनू, रणजीत और राजा जितना हंसा-हंसा कर लोटपोट कर पाएगा कोई। आज भी इसकी डीवीडी हाथोंहाथ बिक जाती है।
करमचंदः करमचंद और उसकी सेक्रटरी किटी की नजरों से कौन सा अपराधी बच सकता है भला। आपने करमचंद देखा होगा तो जरूर जानते होंगे...
नुक्कडः गुरु, खोपड़ी, टीचरजी, हरि... नुक्कड़ के ये कैरेक्टर आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं।
बुनियादः देश के बंटवारे पर बना बुनियाद दूरदर्शन के सबसे हिट सीरियल्स में से एक रहा। रमेश सिप्पी के इस सीरियल में आलोक नाथ, अनीता कंवर, सोनी राजदान, कंवलजीत ने अपने अपने कैरेक्टर को अमर बना दिया।
फूल खिले हैं गुलशन गुलशनः दूरदर्शन का यह सबसे हिट चैट शो रहा। फिल्मी सितारों के इंटरव्यू लेतीं मुस्कुराती तबस्सुम का यह चेहरा...याद आया कुछ।
मुंगेरी लाल के हसीन सपनेः सीरियल इतना हिट हुआ कि इसका नाम जुमला बन गया।
रामायण और महाभारत ने दूरदर्शन को एक नई पहचान दी। इन दोनों सीरियल्स की लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि जब से दोनों सीरियल्स आ रहे होते थे तो सड़कें सूनी हो जाती थीं।
फौजीः इस सीरियल ने बॉलिवुड को एक सुपरस्टार दे दिया। शाहरुख ने इसी सीरियल से ऐंट्री की थी।
व्योमकेश बख्शी: बेहद सादगी और अपने कंप्यूटर जैसे दिमाग से मुश्किल से मुश्किल गुत्थियों को सुलझाते व्योमकेश बख्शी। रजत कपूर इस सीरियल से परदे पर छा गए।
द सोर्ड ऑफ टीपू सुल्तानः दूरदर्शन रंगीन हुआ तो संजय खान ने टीपू सुल्तान की महागाथा छोटे परदे पर उतार दी।
शांतिः नब्बे के दशक में सोप ओपेरा सीरियल्स की शुरुआत हुई। बेहद मजबूत इरादों वाली लड़की शांति की कहानी को मंदिरा बेदी ने टीवी पर बखूबी साकार किया।
sahi baat hai.narayan narayan
ReplyDeleteस्वागत है
ReplyDelete।
गुलमोहर का फूल
एक अच्छी झांकी दिखाई आपने. बचपन बीता है इनके इर्द-गिर्द. दूरदर्दर्शन कल भी प्रासंगिक था और आज भी है. हम सब दूरदर्शन के आभारी है. प्रस्तुति के लिए धन्यवाद!
ReplyDelete- सुलभ (यादों का इन्द्रजाल...)
मुबारक मेरा भी कुबूल कीजिये..
ReplyDeleteबहुत अच्छा लिखते है आप .. स्वागत..
आप सभी लोगों का मै तहेदिल से आभारी हूँ की आपने मेरा ब्लॉग पसंद किया .
ReplyDeleteमेरी कोशिश हमेशा यही रहेगी की मै आपके सामने भारत से जुडी अच्छी अच्छी सामग्री लाऊं .
हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं.......
ReplyDeleteइधर से गुज़रा था, सोचा सलाम करता चलूं..
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